मंज़िल के पास आके लुट गया वो कारवां देखा
रहते बहार के उजड़ गया वो बागवां देखा
घर बहुत देखे जो सजते हैं गुल -ऐ - अरमान से
खाक -ऐ -अरमां पे जो बनता है वो आशियाँ देखा
तूफ़ान के थम जाने पर खामोशियाँ बिखरी देखीं
खामोशी के दामन में मचलता हुआ तूफां देखा
ज़िन्दगी बिकती देखी चंद जज़्बातों की खातिर
पेट की खातिर यहाँ बिकता हुआ इन्सां देखा
तूफ़ान में तो दुनिया साहिल को ढूँढती है
कश्ती - ऐ - दिल को डुबो दे वो किनारा देखा
हुस्न - परस्ती की तो रौनक है जहाँ में महफिल
वफ़ा - परस्ती का बुझता सा सितारा देखा
ख्वाबों में बसके रह गया ऐसा तो जहाँ देखा
दोस्ती के मीठे खंजर का गहरा सा निशाँ देखा
क्या तुमको सुनाएँ हम, क्या तुमको बताएं हम
इंसानों की इस बस्ती में हमने क्या - क्या देखा
रहते बहार के उजड़ गया वो बागवां देखा
घर बहुत देखे जो सजते हैं गुल -ऐ - अरमान से
खाक -ऐ -अरमां पे जो बनता है वो आशियाँ देखा
तूफ़ान के थम जाने पर खामोशियाँ बिखरी देखीं
खामोशी के दामन में मचलता हुआ तूफां देखा
ज़िन्दगी बिकती देखी चंद जज़्बातों की खातिर
पेट की खातिर यहाँ बिकता हुआ इन्सां देखा
तूफ़ान में तो दुनिया साहिल को ढूँढती है
कश्ती - ऐ - दिल को डुबो दे वो किनारा देखा
हुस्न - परस्ती की तो रौनक है जहाँ में महफिल
वफ़ा - परस्ती का बुझता सा सितारा देखा
ख्वाबों में बसके रह गया ऐसा तो जहाँ देखा
दोस्ती के मीठे खंजर का गहरा सा निशाँ देखा
क्या तुमको सुनाएँ हम, क्या तुमको बताएं हम
इंसानों की इस बस्ती में हमने क्या - क्या देखा